
टमाटर में पौधों को सड़ने से कैसे बचाएं: सम्पूर्ण प्रबंधन गाइड
लेखक – सुरज कुमार (M.Sc. Agronomy)
वेबसाइट – SaralKheti.com
परिचय
भारत में टमाटर (Tomato) सबसे अधिक उगाई जाने वाली सब्जियों की फसलों में से एक है। लेकिन इसकी खेती में सबसे बड़ी समस्या आती है – पौधों का सड़ना और फलों का सड़ना (Tomato Plant and Fruit Rotting Problem)। यह समस्या अलग-अलग रोगों और विभिन्न मौसमी परिस्थितियों के कारण होती है, जिससे किसान भाइयों को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि टमाटर के पौधे और फलों को सड़ने से कैसे बचाया जाए, कौन सा रोग किस स्टेज पर आता हैं, और कौन सी दवा कब और कितनी मात्रा में स्प्रे चाहिए, साथ ही कौन-कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिए और और छिड़काव के कितने दिनों बाद परिणाम दिखने लगता है।
टमाटर के पौधे और फलों का सड़ने के मुख्य कारण
- फफूंद जनित रोग (Fungal Diseases)
- बैक्टीरियल रोग (Bacterial Diseases)
- खेतों में नमी का अधिक होना
- गलत सिंचाई प्रबंधन रखना
- कीटों के कारण पौधों का कमजोर होना
टमाटर के पौधे और फलों में सड़न रोग के प्रकार और स्टेज
1. डैम्पिंग ऑफ (Damping Off) – नर्सरी स्टेज

- कब होता है: बीज अंकुरण से 20–25 दिन तक इसका खतरा नर्सरी में रहता है और रोपाई के बाद भी फल आने तक इस बीमारी के आने की संभावना रहती है।
- लक्षण: पौधों का तना जमीन के पास से गलना, पौधों का गिरकर सड़ना।
- नियंत्रण:
- बीज को बोने से पहले 2 ग्राम Trichoderma viride या Carbendazim प्रति किलो बीज को उपचारित करें।
- नर्सरी में Mancozeb 75% WP (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करें।

2. अर्ली ब्लाइट (Early Blight – Alternaria) – वेजिटेटिव से फलन स्टेज
- कब होता है: 25–30 दिन बाद से लेकर यह बीमारी पूरे सीजन भर रहती है।
- लक्षण: पत्तियों पर गोल भूरे धब्बे, पड़ेंगे बाद में धीरे-धीरे पूरे पौधे पर फैलकर पत्तियाँ पीली होकर गिर जाती है।
- नियंत्रण:
- Mancozeb 75 WP या Chlorothalonil 75 WP (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव।
- गंभीर अवस्था पर Azoxystrobin + Difenoconazole (1 मिली/लीटर पानी) छिड़काव।
- Mancozeb + Thyophenate Methyl सबसे अच्छा रहेगा।
3. लेट ब्लाइट (Late Blight – Phytophthora infestans) – फूल और फल बनने के समय
- कब होता है: यह रोग ठंड और नमी वाली स्थिति में, फूल और फल लगने पर।
- लक्षण: पत्तियों पर पानी जैसे धब्बे, बाद में काले होकर सड़ना। फल भी काले होकर खराब हो जाते हैं सड़ जाते हैं।
- नियंत्रण:
- Metalaxyl + Mancozeb (2.5 ग्राम/लीटर पानी) छिड़काव।
- Oxathiapiprolin + Mancozeb (1 ग्राम/लीटर पानी) का प्रयोग प्रभावी।
- Copperoxychloride + Metalxyl 50 gm प्रति 15 लीटर पानी।
4. बैक्टीरियल विल्ट (Bacterial Wilt – Ralstonia solanacearum)
- यह रोग कब आता है: रोपाई के 35–40 दिन के बाद से।
- लक्षण: पौधे अचानक मुरझा जाते हैं, तने को काटने पर चिपचिपा रस निकलता है।
- नियंत्रण:
- रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से निकाल दें।
- मिट्टी में Bleaching Powder (15 किलो/एकड़) प्रयोग करें।
- छिड़काव के लिए Copper Oxychloride + Metalxyl सही है।
5. फल सड़न रोग (Fruit Rot / Blossom End Rot)
- कब होता है: फल बनते समय।
- लक्षण: फल के नीचे काले लाल धब्बे, धीरे-धीरे पूरा फल सड़ जाता है।
- नियंत्रण:
- Calcium Nitrate (2 ग्राम/लीटर पानी) का 2–3 बार छिड़काव।
- Boron की कमी दूर करने के लिए Borax (1 ग्राम/लीटर पानी)।
- Calcium Nitrate + Magnesium Sulphate + Boron + Micronutrients
टमाटर के पौधे और फलों को सड़ने से बचाने के लिए उचित प्रबंधन कैसे करें?
1. खेत की तैयारी कैसे करें
- अच्छी जल निकासी वाले खेत को चुनें।
- गहरी जुताई करके Trichoderma (10 किलो/एकड़) मिलाएँ।
2. फसल चक्र अपनाएं (Crop Rotation)
- लगातार एक ही खेत में एक ही फसल को न लगाना चाहिए।
- टमाटर के बाद दाल वाली फसल या अनाज वाली फसल को उगाना बेहतर रहता है।
3. बीज उपचार
- Trichoderma viride 5–10 ग्राम/किलो बीज।
- Carbendazim 50 WP 2 ग्राम/किलो बीज।
4. सिंचाई प्रबंधन
- पौधों पर सीधे पानी न डालें, केवल जड़ों में दें।
- अत्यधिक नमी से बचें।
- उचित जल निकासी बनाकर रखें
5. जैविक नियंत्रण
- खेत में Trichoderma viride और Pseudomonas fluorescens डालना।
- रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन करना चाहिए।
6. रासायनिक नियंत्रण – स्प्रे शेड्यूल
| रोग का नाम | दवा का नाम | मात्रा/लीटर पानी | छिड़काव का समय |
|---|---|---|---|
| डैम्पिंग ऑफ | Mancozeb 75 WP | 2.5 ग्राम | नर्सरी स्टेज |
| अर्ली ब्लाइट | Chlorothalonil 75 WP | 2.5 ग्राम | 30–35 दिन बाद |
| लेट ब्लाइट | Metalaxyl + Mancozeb | 2.5 ग्राम | ठंडी नमी के मौसम में |
| बैक्टीरियल विल्ट | Copper Oxychloride | 3 ग्राम | रोग दिखते ही |
| फल सड़न | Calcium Nitrate | 2 ग्राम | फल बनने पर 10 दिन अंतराल पर |
सावधानियाँ
- दवा हमेशा साफ पानी में मिलाएँ।
- छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।
- तेज धूप, हवा या बारिश में छिड़काव न करें।
- सुरक्षा के लिए मास्क, दस्ताने और चश्मे का प्रयोग करें।
- दवा बदल-बदल कर प्रयोग करें ताकि रोग में प्रतिरोधक क्षमता न आए।
- सिलिकान स्टिकर का इस्तेमाल जरूर करें।
परिणाम कब दिखाई देंगे?
- फफूंदनाशी दवा का असर 3–4 दिन में दिखना शुरू हो जाता है।
- बैक्टीरियल रोग में सुधार 7–10 दिन बाद दिखता है।
- कैल्शियम या बोरॉन का असर 7 दिन के अंदर फलों पर साफ दिखेगा।
निष्कर्ष
टमाटर में पौधों को सड़ने से बचाने के लिए सही बीज उपचार, खेत की तैयारी, फसल चक्र, सिंचाई प्रबंधन, और समय पर दवाओं का छिड़काव बहुत जरूरी है। किसान भाई अगर उपरोक्त प्रबंधन तकनीकों को अपनाते हैं तो टमाटर की फसल में 30–40% तक उत्पादन बढ़ा सकते हैं और रोगों से होने वाला नुकसान काफी हद तक कम कर सकते हैं।
👉 यह लेख SaralKheti.com पर प्रकाशित किया गया है।
✍️ लेखक – सुरज कुमार, M.Sc. Agronomy
