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Afim ki kheti – poori jankari | 10 jaruri super tips

February 25, 2026
Afim Ki Kheti
Index

    Table of Contents

    Afim Ki Kheti – पूरी जानकारी हिंदी में

    Afim Ki Kheti भारत में एक विशेष और नियंत्रित फसल है। यह फसल बहुत कम किसानों को उगाने की अनुमति मिलती है क्योंकि इसका उपयोग दवाइयाँ बनाने में किया जाता है। भारत सरकार की अनुमति लेकर ही इसकी खेती की जा सकती है। अगर आप अफीम की खेती करना चाहते हैं, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी – लाइसेंस से लेकर

    फसल की कटाई तक।

    1. अफीम क्या होती है?

    अफीम (Opium) एक प्राकृतिक पदार्थ है जो पोस्त (Papaver somniferum) नामक पौधे से निकाला जाता है। इस पौधे के कच्चे फल को चीरा लगाने पर जो दूध जैसा रस निकलता है, उसे सुखाकर अफीम बनाई जाती है। इसका उपयोग मॉर्फिन, कोडीन और अन्य दर्द निवारक दवाइयाँ बनाने में होता है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहाँ कानूनी रूप से अफीम उगाई जाती है।

    2. Afim Ki Kheti कहाँ होती है?

    भारत में Afim Ki Kheti मुख्यतः तीन राज्यों में होती है:

    • राजस्थान – चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ जिले प्रमुख हैं।

    • मध्य प्रदेश – मंदसौर, नीमच, रतलाम जिले प्रमुख हैं।

    • उत्तर प्रदेश – बाराबंकी और कुछ अन्य जिले।

    इन क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी अफीम की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। मंदसौर और नीमच को अफीम की खेती का गढ़ माना जाता है।

    3. अफीम की खेती के लिए लाइसेंस (परमिट) कैसे मिलता है?

    Afim Ki Kheti करने के लिए सबसे पहले सरकारी अनुमति लेना जरूरी है। बिना लाइसेंस के अफीम उगाना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा हो सकती है।

    लाइसेंस कौन देता है?

    भारत में अफीम की खेती का लाइसेंस नारकोटिक्स विभाग (Narcotics Control Bureau) और वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाला केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Bureau of Narcotics – CBN) देता है। इनका मुख्यालय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में है।

    लाइसेंस के लिए जरूरी शर्तें:

    • किसान उसी अधिसूचित क्षेत्र (Notified Area) का निवासी होना चाहिए जहाँ खेती की अनुमति है।

    • पिछले वर्षों में अवैध बिक्री या नशीले पदार्थों से जुड़ा कोई मामला न हो।

    • किसान के पास खुद की जमीन या पट्टे की जमीन होनी चाहिए।

    • सरकार हर साल तय करती है कि कितने हेक्टेयर में खेती हो सकती है।

    • पूरी फसल सरकारी अफीम केंद्र पर जमा करनी होती है। किसान खुद अफीम बेच नहीं सकता।

    4. Afim Ki Kheti के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

    जलवायु:

    • अफीम की फसल ठंडे और शुष्क मौसम में अच्छी होती है।

    • तापमान 10°C से 25°C के बीच सबसे अच्छा माना जाता है।

    • फसल के दौरान ज्यादा बारिश नुकसानदायक होती है।

    • पाला (frost) फसल को बहुत नुकसान पहुँचाता है।

    मिट्टी:

    • दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है।

    • मिट्टी का pH 7.0 से 8.0 के बीच होना चाहिए।

    • जल निकासी अच्छी होनी चाहिए – खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए।

    5. बुवाई का समय और तरीका

    अफीम की बुवाई का सही समय अक्टूबर के अंत से नवंबर के शुरुआत तक होता है। इस समय तापमान उचित रहता है और फसल अच्छी तरह जम जाती है।

    बुवाई का तरीका:

    • बीज को छिटकाव विधि (Broadcasting) या लाइन से बोया जाता है।

    • एक हेक्टेयर में लगभग 6-8 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है।

    • बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करें और मिट्टी भुरभुरी बना लें।

    • लाइन से बोने पर लाइन से लाइन की दूरी 25-30 सेमी रखें।

    6. सिंचाई और खाद

    सिंचाई:

    • पहली सिंचाई बुवाई के 10-15 दिन बाद करें।

    • फसल के दौरान 4 से 6 सिंचाई की जरूरत होती है।

    • फूल आने के समय हल्की सिंचाई करें – ज्यादा पानी से फूल गिर सकते हैं।

    खाद और उर्वरक:

    • बुवाई से पहले खेत में 15-20 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद मिलाएं।

    • नाइट्रोजन: 80-100 किग्रा प्रति हेक्टेयर।

    • फास्फोरस: 40-50 किग्रा प्रति हेक्टेयर।

    • पोटाश: 30-40 किग्रा प्रति हेक्टेयर।

    7. चीरा लगाना और अफीम निकालना (Lancing)

    यह Afim Ki Kheti की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। फूल झड़ने के बाद जब फल (डोडा) पककर हरे रंग का हो जाए, तब चीरा लगाया जाता है।

    • शाम के समय एक खास चाकू (Nustura) से डोडे पर हल्का चीरा लगाया जाता है।

    • रात भर में सफेद दूध (लेटेक्स) बाहर निकलता है और सूख जाता है।

    • सुबह इस सूखे रस को खुरच कर इकट्ठा किया जाता है – यही अफीम है।

    • एक डोडे पर 3-4 बार चीरा लगाया जा सकता है।

    • यह काम बहुत सावधानी और कुशलता से करना होता है।

    8. फसल की पैदावार और सरकारी खरीद

    अफीम की उपज प्रति हेक्टेयर 50-60 किलोग्राम तक हो सकती है। हालाँकि सरकार हर साल एक न्यूनतम उपज सीमा (Minimum Qualifying Yield – MQY) तय करती है।

    • अगर किसान सरकार द्वारा तय न्यूनतम मात्रा जमा नहीं कर पाता, तो अगले साल लाइसेंस नहीं मिलता।

    • सरकार हर किलोग्राम अफीम का एक निश्चित दाम देती है।

    • पूरी फसल सरकारी खरीद केंद्र पर जमा करना अनिवार्य है। किसान खुद से बाजार में नहीं बेच सकता।

    9. प्रमुख रोग और कीट

    अफीम की फसल में निम्न रोग और कीट लगते हैं:

    • डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew): पत्तियों पर सफेद धब्बे पड़ते हैं। मैंकोज़ेब का छिड़काव करें।

    • तना सड़न (Stem Rot): अधिक नमी से होता है। जल निकासी सुधारें।

    • माहू/एफिड (Aphid): पत्तियों का रस चूसता है। इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग करें।

    • पोस्त की लट (Caterpillar): पत्तियाँ खाती है। नीम के तेल का छिड़काव फायदेमंद है।

    10. Afim Ki Kheti से होने वाला लाभ

    अफीम की खेती आर्थिक रूप से बहुत फायदेमंद हो सकती है। एक हेक्टेयर में लगभग ₹1,50,000 से ₹2,50,000 तक की कमाई हो सकती है। इसके अलावा अफीम के बाद उगाई जाने वाली फसलों के लिए मिट्टी की उर्वरता बेहतर हो जाती है।

    • डोडे (फल) बेचने से भी अतिरिक्त आमदनी होती है।

    • पोस्त के बीज (खसखस) का भी बाजार में अच्छा दाम मिलता है।

    11. कानूनी जानकारी – ध्यान रखें!

    अफीम की खेती भारत में NDPS Act (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) के तहत नियंत्रित है।

    ⚠️ बिना लाइसेंस अफीम उगाना गंभीर अपराध है– 10 साल से ज्यादा जेल हो सकती है।

    ⚠️ अफीम को अवैध तरीके सेबेचना या रखना भी दंडनीय है।

    ⚠️ सभी अफीम सरकारी केंद्र पर जमा करें और लाइसेंस के नियमों का पालन करें।

    निष्कर्ष

    अफीम की खेती एक लाभदायक परंतु जिम्मेदारी भरी खेती है। अगर आप अधिसूचित क्षेत्र में रहते हैं और सरकारी नियमों का पालन करते हैं, तो यह खेती आपकी आय बढ़ाने का अच्छा जरिया बन सकती है। हमेशा लाइसेंस लेकर और सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही खेती करें।

    अगर आप अफीम की खेती के बारे में और जानकारी चाहते हैं तो अपने नजदीकी कृषि केंद्र या सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स से संपर्क करें।

    saralkheti.com

    अफीम की खेती — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    प्रश्न 1: क्या मैं अफीम की खेती कर सकता हूँ?

    हाँ, आप अफीम की खेती कर सकते हैं — लेकिन केवल तभी जब आपके पास सरकारी लाइसेंस हो।
     
    भारत में अफीम की खेती पूरी तरह से कानूनी है, परंतु इसके लिए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Bureau of Narcotics – CBN), ग्वालियर से अनुमति लेनी होती है।
     
    लाइसेंस के लिए जरूरी शर्तें:
    • आप उस अधिसूचित क्षेत्र (Notified Area) के निवासी हों जहाँ खेती की अनुमति है।
    • आपका कोई आपराधिक या नशा-तस्करी का रिकॉर्ड न हो।
    • आपके पास खुद की या पट्टे की जमीन हो।
    • आप पूरी फसल सरकारी केंद्र पर जमा करें।
     
    बिना लाइसेंस अफीम उगाना NDPS Act 1985 के तहत गंभीर अपराध है।

    प्रश्न 2: अफीम की खेती के लिए कौन सा राज्य सबसे अच्छा है?

    भारत में अफीम की खेती के लिए तीन राज्य सबसे अच्छे माने जाते हैं:
     
    1. मध्य प्रदेश (सबसे अच्छा) – मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले देश में सबसे ज्यादा अफीम उत्पादन करते हैं। यहाँ की काली मिट्टी और ठंडा मौसम इस फसल के लिए आदर्श है।
     
    2. राजस्थान – चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिले भी अफीम उत्पादन में आगे हैं।
     
    3. उत्तर प्रदेश – बाराबंकी और कुछ अन्य जिलों में भी सीमित मात्रा में खेती होती है।
     
    मध्य प्रदेश का मंदसौर जिला “अफीम की राजधानी” कहलाता है क्योंकि यहाँ का उत्पादन सबसे अधिक और गुणवत्ता सबसे उम्दा है।

    प्रश्न 3: अफीम की खेती में कितने दिन में फल आता है?

    अफीम की फसल बुवाई से लेकर पूरी तैयारी तक लगभग 120 से 150 दिन (4 से 5 महीने) लेती है।
     
    फसल का समयचक्र:
    • बुवाई: अक्टूबर के अंत – नवंबर की शुरुआत
    • अंकुरण: 10-15 दिन में
    • पौधा तैयार: 45-60 दिन में
    • फूल आना: बुवाई के 90-100 दिन बाद
    • फूल झड़ना और डोडा बनना: 110-120 दिन
    • चीरा लगाने के लिए डोडा तैयार: 120-130 दिन
    • फसल समाप्ति: फरवरी-मार्च के बीच
     
    यानी नवंबर में बोई गई फसल फरवरी-मार्च तक चीरा लगाने के लिए तैयार हो जाती है। एक डोडे पर 3-4 बार चीरा लगाया जा सकता है।

    प्रश्न 4: अफीम की खेती के लिए मिट्टी कैसी चाहिए?

    अफीम की खेती के लिए सही मिट्टी का चुनाव बहुत जरूरी है।
     
    सबसे उपयुक्त मिट्टी:
    • दोमट मिट्टी (Loamy Soil) – सबसे अच्छी मानी जाती है।
    • बलुई दोमट (Sandy Loam) – भी उपयुक्त है।
    • काली मिट्टी (Black Cotton Soil) – मध्य प्रदेश में बहुत अच्छे परिणाम देती है।
     
    मिट्टी की जरूरी विशेषताएं:
    • pH मान: 7.0 से 8.0 के बीच (हल्की क्षारीय)
    • जल निकासी बहुत अच्छी होनी चाहिए — पानी रुकने से जड़ें सड़ जाती हैं।
    • कार्बनिक पदार्थ (Organic Matter) की मात्रा अच्छी हो।
    • मिट्टी गहरी और भुरभुरी हो।
     
    बुवाई से पहले खेत में 15-20 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद मिलाएं — इससे उत्पादन बेहतर होता है।

    प्रश्न 5: अफीम की खेती का सीजन (मौसम) क्या है?

    अफीम एक रबी फसल है, यानी यह ठंड के मौसम में उगाई जाती है।
     
    अफीम का सीजन:
    • बुवाई का समय: अक्टूबर अंत से नवंबर मध्य तक (सर्वोत्तम)
    • फसल का मौसम: नवंबर से मार्च तक
    • चीरा लगाने का समय: जनवरी-फरवरी
    • कटाई: फरवरी-मार्च
     
    अफीम के लिए आदर्श जलवायु:
    • तापमान: 10°C से 25°C
    • ठंडी और शुष्क हवा जरूरी है।
    • फूल आने के समय बारिश नुकसानदायक होती है।
    • पाला (Frost) फसल को बर्बाद कर सकता है।
    • बहुत अधिक गर्मी या नमी से रोग लगने का खतरा।
     
    सही समय पर बुवाई करना बहुत जरूरी है — देर से बोने पर फूल और चीरे का समय प्रभावित होता है।

    प्रश्न 6: अफीम और खसखस में क्या अंतर है?

    अफीम और खसखस (पोस्त दाना) दोनों एक ही पौधे — पोस्त (Papaver somniferum) — से आते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं।
     
    मुख्य अंतर:
     
    अफीम (Opium):
    • यह पौधे के कच्चे डोडे (फल) से निकाला गया दूधिया रस होता है।
    • डोडे पर चीरा लगाने पर जो लेटेक्स निकलता है, उसे सुखाकर अफीम बनाई जाती है।
    • इसमें मॉर्फिन, कोडीन जैसे नशीले तत्व होते हैं।
    • यह NDPS Act के तहत नियंत्रित पदार्थ है।
    • केवल लाइसेंस के साथ उत्पादन और सरकार को बेचना अनिवार्य है।
     
    खसखस (Khaskhas / Poppy Seeds):
    • यह पके हुए डोडे के बीज होते हैं।
    • इनमें नशीले तत्व नहीं होते।
    • खाने में उपयोग होते हैं — मिठाई, रोटी, करी आदि में।
    • बाजार में आसानी से मिलते हैं।
    • इन पर NDPS Act लागू नहीं होता।
     
    सरल शब्दों में: अफीम = कच्चे फल का रस, खसखस = पके फल के बीज।

    प्रश्न 7: अफीम से क्या बनाया जाता है?

    अफीम एक बहुउपयोगी पदार्थ है जिससे कई महत्वपूर्ण दवाइयाँ और उत्पाद बनाए जाते हैं।
     
    दवाइयाँ और औषधीय उपयोग:
    • मॉर्फिन (Morphine) – कैंसर और गंभीर दर्द की सबसे प्रभावी दवा।
    • कोडीन (Codeine) – खाँसी और हल्के दर्द की दवाओं में।
    • थेबेन (Thebaine) – अन्य दर्द निवारक दवाओं का आधार।
    • पेपेवरिन (Papaverine) – मांसपेशियों की ऐंठन में उपयोगी।
    • नालोक्सोन (Naloxone) – नशे के ओवरडोज़ का इलाज।
     
    भारत में अफीम से बनी दवाइयाँ:
    • सरकारी फार्मा कंपनियाँ जैसे GAPL (Government Opium and Alkaloid Works) अफीम से दवाइयाँ बनाती हैं।
    • गाजियाबाद और नीमच में सरकारी अफीम फैक्ट्रियाँ हैं।
     
    अन्य उपयोग:
    • खसखस (बीज) — खाने में।
    • पोस्त का तेल — खाना पकाने और पेंट उद्योग में।
    • पौधे का भूसा — पशु चारे में।
     
    ध्यान दें: अफीम से अवैध रूप से हेरोइन भी बनाई जाती है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।

    प्रश्न 8: क्या भारत में अफीम की खेती कानूनी (Legal) है?

    हाँ, भारत में अफीम की खेती कानूनी है — लेकिन सिर्फ सरकारी लाइसेंस के साथ।
     
    कानूनी ढाँचा:
    • NDPS Act 1985 (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत अफीम उत्पादन नियंत्रित है।
    • Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Rules 1985 में खेती की प्रक्रिया तय है।
    • केवल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्रों में ही खेती की अनुमति है।
     
    लाइसेंस देने वाला विभाग:
    • Central Bureau of Narcotics (CBN), Gwalior — यही एकमात्र संस्था है जो लाइसेंस देती है।
     
    कानूनी अफीम खेती की शर्तें:
    • पूरी फसल सरकारी केंद्र पर जमा करना अनिवार्य।
    • सरकार तय दाम पर खरीदती है।
    • निजी बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।
     
    बिना लाइसेंस खेती की सजा:
    • 10 साल से लेकर आजीवन कारावास।
    • भारी जुर्माना।
    • संपत्ति जब्ती।

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