Writer: Mr. Suraj Kumar. M.Sc. Agronomy.
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Tomato Fruit Rot: नमस्कार किसान साथियों एक फिर स्वागत है आपका हमारे ब्लाग में। साथियों आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको बताएंगे टमाटर की एक बहुत आम और खतरनाक बीमारी के बारे में

टमाटर का फल सड़न, यह एक ऐसी बीमारी जो किसान का लगभग 35 से 50 प्रतिशत का नुक़सान करा देता है। अगर किसान साथियों समय रहते इसको पहचान लिया जाये या टमाटर रोपाई से पहले ही इसके रोकथाम के लिए पूर्व योजना बना लिया जाये तो इस बीमारी पर कंट्रोल किया जा सकता है।
किसान साथियों हमें यह जानना बहुत जरूरी होता है कि टमाटर में फल सड़न या टपका बीमारी कब आती है इसके क्या लक्षण हैं, किन कारणों से यह बीमारी आती है। तो किसान साथियों के लिए यह बहुत आसान हो जाता है।
Tomato Fruit Rot की पहचान कैसे करें?
tomato fruit rot इस बीमारी में टमाटर का फल पहले नीचे की तरफ से एक छोटा सा भूरा धब्बा पड़ता है फिर धीरे-धीरे यही धब्बा बड़ा होता चला जाता है। और फल अंदर से ही सड़ने लगता है। और अगर नमी ज्यादा रहती है तो सफेदी लिए हुए फफूंद भी दिखाई देता है।

किसान साथियों अगर आपके खेत में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो आपको सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे फलों की बाजार में कोई कीमत नहीं होती है।
Tomato end rot or fruit rot यह बीमारी क्यों लगती है?
किसान साथियों टमाटर की फसल में यह बीमारी कई कारणों से आती है। कैल्शियम की कमी, बोरान की कमी, अधिक सिंचाई नमी ज्यादा, अधिक नाइट्रोजन देना, फंगस और मल्चिंग का प्रयोग न करना।
साथियों जब पौधों को कैल्शियम की आपूर्ति नहीं हो पाती है तो फंगस का आक्रमण आसानी से हो जाता है। कैल्शियम फंगस के प्रति फलों प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और बोरान से फलों की साइज़ बढ़ती है और फल चमकदार होता है।कैल्शियम और बोरान एक सूक्ष्म पोषक तत्व है पौधों में इनकी ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यही अगर पौधों को नहीं मिला तो भारी नुक्सान हो जाता है।
अत्यधिक या संतुलित नाइट्रोजन ना देने से फलों की बाहरी झिल्लियां कमजोर हो जाती है। ऐसे में फंगस बहुत ही आसानी से उसको हानि पहुंचा देता है। ऐसे में टमाटर का फल और पत्तियां सख़्त रहे इसके लिए स्प्रे में सिलिकॉन का इस्तेमाल करें।
Tomato fruit rot को कैसे रोंके?
1. संतुलित सिंचाई
हल्की लेकिन नियमित सिंचाई करें पानी का ठहराव न होने दे. 2. कैल्शियम का प्रयोग
स्प्रे करें: Calcium Nitrate @ 2–3 ग्राम/लीटर पानी 10–12 दिन के अंतराल पर 2–3 छिड़काव
3. बोरान का प्रयोग
Boron @ 1 ग्राम/लीटर पानीफूल और फल बनने की अवस्था में
4. फंगल रोग नियंत्रण
कोई एक का छिड़काव करें:
Mancozeb
Azoxystrobin + Difenoconazole
Copper आधारित फफूंदनाशी
